चंडीगढ़ में बनेंगी नई अस्थायी पार्किंग

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जहां-जहां खाली जमीन उपलब्ध, चिन्हित कर अस्थायी पार्किंग स्थल विकसित किए जाएंगे

शहर में ऐसा होने से यातायात सुचारू रहेगा व सड़कों पर जाम की स्थिति में सुधार आएगा

रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी से करीब 10 लाख वाहनों का डेटा भी जुटाया गया है

निगम बंद पड़ी मल्टी-लेवल पार्किंग दोबारा शुरू करने की तैयारी कर रहा है : मेयर जोशी

चंडीगढ़

चंडीगढ़ में वाहनों की संख्या आबादी से अधिक हो जाने के कारण पार्किंग की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए नगर निगम ने नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। शहर में जहां-जहां खाली जमीन उपलब्ध है, उन्हें चिन्हित कर अस्थायी पार्किंग स्थल विकसित किए जाएंगे। अभी ट्राइसिटी के टीनएजर्स की तरफ से सड़कों पर वाहन खड़े करने से ट्रैफिक बाधित होता है, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहनों को केवल निर्धारित पार्किंग में ही खड़ा करना अनिवार्य होगा। इससे सड़कों पर यातायात सुचारू रहेगा और जाम की स्थिति में सुधार आएगा। इन पार्किंग स्थलों का निर्माण और संचालन पूरी तरह नगर निगम द्वारा ही किया जाएगा।

10 लाख वाहनों का डेटा जुटाया

नगर निगम बंद पड़ी मल्टी-लेवल पार्किंग को दोबारा शुरू करने और मौजूदा पार्किंग की क्षमता बढ़ाने की भी तैयारी कर रहा है। वहीं, जो अंडरग्राउंड पार्किंग IIT रुड़की के स्ट्रक्चरल ऑडिट में असुरक्षित पाई गई थीं, उन्हें हटाकर नई आधुनिक मल्टी-लेवल पार्किंग बनाई जाएगी। मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि उनका लक्ष्य चंडीगढ़ को एक मॉडल शहर बनाना है, जहां नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलें। इसके लिए नगर निगम ने रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (RLA) से करीब 10 लाख वाहनों का डेटा भी जुटाया है।

हर सेक्टर में पार्किंग संकट भी

इस मुद्दे को राज्य प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी उठा चुके हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि जगह की कमी को देखते हुए मल्टी-लेवल पार्किंग विकसित की जाए और मामूली शुल्क के जरिए बेहतर सुविधाएं दी जाएं, जिससे नगर निगम की आय भी बढ़े। शहर के सभी 56 सेक्टरों में पार्किंग की समस्या बनी हुई है। रिहायशी इलाकों में रात के समय और कमर्शियल क्षेत्रों में दिनभर दबाव अधिक रहता है। सड़कों पर खड़े वाहनों के कारण कई बार जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।

नई पार्किंग के लिए खास प्लान

नगर निगम खाली पड़ी जमीन की पहचान कर स्थायी और अस्थायी पार्किंग विकसित करेगा। कोशिश होगी कि एक बार साइट तय होने के बाद बार-बार बदलाव न करना पड़े। यह पूरा प्रोजेक्ट नगर निगम द्वारा ही संचालित किया जाएगा और इसे PPP मॉडल पर नहीं दिया जाएगा। शहर में पहले से 89 पार्किंग स्थलों पर “वन पास सिस्टम” लागू है। इसके तहत चार पहिया वाहन: ₹500, जबकि दो पहिया वाहन: ₹250 वसूले जाएंगे। लोग ऑनलाइन या काउंटर से पास बनवा सकते हैं। भविष्य में नए शुल्क तय किए जाएंगे।

13 लाख आबादी, 15 लाख वाहन

नगर निगम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे स्थानों की पहचान करें जहां अस्थायी पार्किंग बनाई जा सके। साथ ही पार्किंग स्थलों पर बेहतर लाइटिंग, आसान पहुंच, समतल जमीन और सुचारू ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ की आबादी लगभग 13 लाख है, जबकि रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या 15 लाख के करीब पहुंच गई है। टू-व्हीलर की हिस्सेदारी लगभग 69% और कारों की करीब 22% है।

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