पंजाबी संगीत जगत के दिग्गज उस्ताद पूरन शाहकोटी सुपुर्द-ए-खाक, मास्टर सलीम ने पूरी की अंतिम इच्छा

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उनकी इच्छा थी कि उन्हें श्मशानघाट न ले जाकर दफनाया जाए

आखिरी दर्शन को घर से बाहर लाया गया उनका पार्थिव शरीर

माहौल भावुक हो गया और हर शख्स की आंखें नम नजर आईं

बेहद सॉफ्ट स्पोकन थे, सख्ती में भी प्यार होता था : राय जुझार

गुरु माना और हर मुलाकात उनके लिए खास रही : जसबीर जस्सी

जालंधर

पंजाबी संगीत जगत के दिग्गज उस्ताद पूरन शाहकोटी को आज उनके चाहने वालों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। मास्टर सलीम के पिता और मशहूर गायकों के उस्ताद पूरन शाहकोटी को उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनकी इच्छा थी कि उन्हें श्मशानघाट न ले जाकर दफनाया जाए। इसी के चलते जालंधर के देओल स्थित केपी नगर के प्लॉट नंबर 13 में दोपहर करीब 12 बजे उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

आखिरी दर्शन को घर से निकला पार्थिव शरीर

सुपुर्द-ए-खाक से पहले उस्ताद पूरन शाहकोटी के पार्थिव शरीर को उनके घर से बाहर लाया गया, जहां परिवार, रिश्तेदारों और संगीत जगत से जुड़े लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए। इस दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया और मौजूद हर शख्स की आंखें नम नजर आईं।

अंतिम विदाई में उमड़ा कलाकारों का सैलाब

यहां प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ पंजाबी संगीत और फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम पहुंचे। एडीसी जसबीर सिंह, डीसीपी नरेश डोगरा, गायक हंसराज हंस, युवराज हंस, गुरलेज अख्तर, फिरोज खान, कंठ कलेर, मुकेश अनायत, सचिन अहूजा, जी-खान, राय जुझार और अफसाना खान सहित कई दिग्गज कलाकार रहे।

पिता को याद कर भावुक हुए मास्टर सलीम

इस दौरान मास्टर सलीम मीडिया के सामने अपने पिता को याद कर भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने मीडिया से अपील की कि उनके पिता की अंतिम रस्मों और सुपुर्द-ए-खाक की वीडियोग्राफी न की जाए। इसके बाद मीडिया को बाहर ही रुकने का आग्रह किया गया।

कलाकारों ने याद किया उस्ताद का योगदान

पंजाबी सिंगर राय जुझार ने उस्ताद पूरण शाहकोटी को याद करते हुए कहा कि वह बेहद सॉफ्ट स्पोकन थे और उनकी सख्ती में भी प्यार छिपा होता था। उन्होंने कहा कि उस्ताद ने इंडस्ट्री को कई बड़े कलाकार दिए हैं और यह नुकसान कभी पूरा नहीं हो सकता।

गुरु का जाना बेहद ही पीड़ादायक होता है

वहीं गायक जसबीर जस्सी ने कहा कि उन्होंने उस्ताद पूरण शाहकोटी को अपना गुरु माना और हर मुलाकात उनके लिए खास रही। गुरु का जाना बेहद पीड़ादायक होता है और उनके साथ एक पूरा युग खत्म हो गया।

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