जालंधर के जमशेर खास में लग रहे बायो-गैस/बायो-फ्यूल प्लांट के खिलाफ चल रहा किसानों का धरना साढे चार घंटे बाद खत्म हो गया है। सुबह किसानों ने अमृतसर-दिल्ली हाईवे पर धरना लगाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद किसान सोफी पिंड में रोड पर धरना देने के लिए बैठ गए। किसान यूनियन सिद्धूपुर के नेताओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने कहा कि प्लांट को आबादी से दूर शिफ्ट किया जाए।

एडीसीपी हरविंदर गिल ने किसानों को मनाकर खत्म करवा दिया है। इस मौके पर पहुंचीं नगर निगम की जॉइंट कमिश्नर मनदीप कौर ने किसानों को भरोसा दिया कि उनकी मांग पर विचार किया जाएगा। निगम के पास जमीन हुई तो वह इस प्लांट को दूसरी जगह शिफ्ट करवा देंगे। इस पर 5 फरवरी तक फैसला ले लिया जाएगा। जॉइंट कमिश्नर के आश्वासन के बाद किसान धरने से उठ गए। किसान नेताओं ने कहा कि अगर 5 तक कोई हल न निकला तो वह फिर से हाईवे जाम करेंगे।
प्लांट को लेकर स्थानीय लोगों, किसानों और नेताओं का कहना था कि यह प्लांट आबादी वाले क्षेत्र के लिए खतरनाक हो सकता है। किसान यूनियन सिद्धूपुर ने इसके गेट को लेकर भी सवाल उठाया है। किसान नेताओं का कहना है कि प्लांट के दो गेट लगाए जा रहे हैं। एक गेट मंडी की तरफ बनाया जा रहा है जो बिल्कुल गलत है। इस गेट का काम रुकना चाहिए नहीं तो मंडी ही खत्म हो जाएगी।
किसान और लोग इसलिए कर रहे प्लांट का विरोध
किसानों और लोगों का आरोप है कि इस प्लांट से सेहत खराब होने और प्रदूषण का डर है। इसके अलावा चारा मंडी खत्म हो जाएगी। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी खराब होगा और पराली की ट्रालियां आने से हादसों का खतरा ज्यादा होगा। इसके साथ ही लोगों का कहना है कि घनी आबादी में पराली से लोडेड ट्रालियां आएंगी जिससे हादसों का खतरा रहेगा। घनी आबादी के पास ऐसा प्लांट किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
23 जनवरी को दी थी धरने की चेतावनी
किसान यूनियनों और स्थानीय निवासियों ने सरकार को 23 जनवरी 2026 तक का अल्टीमेटम दिया था कि प्लांट का काम रोक दिया जाए, वरना वे खुद निर्माण कार्य को हटा देंगे। उन्हें कैंट से कांग्रेस एमएलए परगट सिंह का समर्थन मिल गया था। पहले दिन धरने में जालंधर कैंट से कांग्रेस विधायक परगट सिंह और आदमपुर के विधायक सुखविंदर सिंह कोटली ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया था। उनका कहना है कि सरकार को इस प्रोजेक्ट को आबादी से दूर किसी अन्य स्थान पर लगाए।

डेयरियों के गोबर से बनेगी खाद-गैस
जालंधर के जमशेर खास में लगने वाला बायोफ्यूल प्रोजेक्ट जालंधर नगर निगम लगा रहा है। निगम इसे पीपीपी मोड से लगाएगा। इसके लिए प्राइवेट कंपनी से कांट्रेक्ट किया गया है। 2 एकड़ में लगने वाले इस प्लांट की अभी चारदीवारी हुई है। इसकी मैनेजमेंट निगम और बायोगैस विकास एजेंसी देखेगी। स्वच्छ भारत योजना के तहत लग रहा- ये प्रोजैक्ट केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन का हिस्सा है और पंजाब सरकार लगवा रही है। कचरा प्रबंधन के तहत इसे वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान मंजूरी दी गई थी। अभी 3 महीने से इसका काम चल रहा है। स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि यह प्लांट चारा मंडी की जमीन पर बनाया जा रहा है। लोगों को डर है कि इससे इलाके में बदबू फैलेगी और बीमारियां बढ़ेंगी। निगम का दावा-इससे डेयरियों का प्रदूषण घटेगा- नगर निगम का दावा है कि इससे 25 एकड़ में फैली जमशेर खास की डेयरियों के गोबर से खाद बनाई जा सकेगी। इससे प्रदूषण कम होगा और कचरे से गैस भी बनेगी।

सरकार के पास और भी जमीन, शिफ्ट हो प्रोजेक्ट – परगट सिंह
जालंधर कैंट के MLA परगट सिंह ने कहा कि प्लांट लगना अच्छी बात है, लेकिन ये आबादी से दूर होना चाहिए। जालंधर कार्पोरेशन ने 25 एकड़ एरिया डेयरियों के लिए दिया है। ये जो प्लांट लग रहा है, आबादी से 300 मीटर के दायरे में है। जालंधर कार्पोरेशन के पास जमशेर में आबादी से दूर भी जगह है। यहां से शिफ्ट कर इस प्लांट को आबादी से दूर लगाया जाना चाहिए। यहां गोबर डंप होगा जिससे लोगों को बदबू का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा ट्रैक्टर-ट्रालियां आने से हर समय स्कूल और ड्यूटी पर जाने वाले लोगों के साथ हादसे का डर रहेगा। कार्पोरेशन ने प्लांट लगाना है तो लगाए लेकिन इसे आबादी से हटकर लगाया जाना चाहिए।

