पंजाब में प्राइवेट स्कूलों में मुफ्त पढ़ाई का मौका

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गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शुरू किया गया पोर्टल

फिलहाल राज्य के 1500 से अधिक प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर रजिस्टर्ड

एडमिशन के लिए rte.epunjabschool.gov.in पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन

पंजाब डेस्क

पंजाब में राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूलों में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो गई है। शिक्षा विभाग ने इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल लाइव कर दिया है, जिसके जरिए अभिभावक आवेदन कर सकते हैं। गौरतलब है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शिक्षा विभाग ने यह पोर्टल शुरू किया है। फिलहाल राज्य के 1500 से अधिक प्राइवेट स्कूल इस पोर्टल पर रजिस्टर्ड हो चुके हैं। इस योजना के तहत स्टूडेंट्स केवल एंट्री क्लास (नर्सरी से पहली) में ही मुफ्त एडमिशन ले सकेंगे।

12.5-12.5 प्रतिशत सीटें तय की गई

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और डिसएडवांटेज्ड ग्रुप्स के लिए 12.5-12.5 प्रतिशत सीटें तय की गई हैं। EWS कैटेगरी में आने वाले अभिभावकों को आय और संपत्ति प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा, जबकि डिसएडवांटेज्ड ग्रुप में SC, OBC, दिव्यांग, अनाथ, वॉर विडो के बच्चे शामिल हैं। एडमिशन के लिए अभिभावकों को rte.epunjabschool.gov.in पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे।

एडमिशन के लिए आयु सीमा भी तय

दस्तावेजों के बिना आवेदन मान्य नहीं होगा। स्कूल चुनते समय नजदीकी स्कूल को प्राथमिकता देना जरूरी है। पहला विकल्प 0-3 किलोमीटर और दूसरा 3-6 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए। दूर के स्कूल चुनने पर बस का खर्च अभिभावकों को खुद उठाना होगा।एडमिशन के लिए आयु सीमा भी तय की गई है नर्सरी के लिए 3 साल, केजी के लिए 4 साल, यूकेजी के लिए 5 साल और पहली कक्षा के लिए 6 साल (1 अप्रैल 2026 तक) होना जरूरी है।

15 दिनों के भीतर मामलों का निपटारा

स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे RTE स्टूडेंट्स से कोई स्क्रीनिंग टेस्ट या फीस न लें और उनके साथ किसी तरह का भेदभाव न करें। सभी सुविधाओं में बराबर अधिकार देना होगा। यदि आवेदन में गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज पाए जाते हैं तो एडमिशन रद्द कर दिया जाएगा और अभिभावकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। शिकायत के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो 15 दिनों के भीतर मामलों का निपटारा करेंगे।

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