त्रुटि सुधारने के लिए रजिस्ट्रेशन होते ही उनके पेरेंट्स के मोबाइल पर SMS भेजे जाएंगे
कोई गलती होती है तो अभिभावक सात दिनों के भीतर स्कूल जाकर ठीक करवा सकेंगे
पेरेंट्स और प्रबंधन को छोटी-छोटी गलतियों के लिए बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे
डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र का नंबर दर्ज करते ही सरकारी रिकॉर्ड स्वतः प्राप्त हो जाएगा
पंजाब डेस्क
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने स्टूडेंट के सर्टिफिकेट और मार्कशीट में होने वाली गलतियों को रोकने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू की है। अब आठवीं, दसवीं और बारहवीं कक्षा के स्टूडेंट का रजिस्ट्रेशन होते ही उनके पेरेंट्स के मोबाइल पर SMS भेजे जाएंगे, ताकि समय रहते किसी भी त्रुटि को सुधारा जा सके। नई व्यवस्था के तहत स्कूल की तरफ से स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन डेटा बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड करते ही माता-पिता को स्टूडेंट्स का नाम, माता-पिता का नाम, जन्म तिथि और अन्य जरूरी जानकारी वाला संदेश प्राप्त होगा। यदि किसी प्रकार की गलती नजर आती है तो अभिभावक सात दिनों के भीतर स्कूल जाकर उसे ठीक करवा सकेंगे।
छोटी-छोटी गलतियों के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर
बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह के अनुसार, अब पेरेंट्स और स्कूल प्रबंधन को छोटी-छोटी गलतियों के लिए बोर्ड कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। निर्धारित समय में स्कूल स्तर पर ही सुधार संभव होगा। यदि सात दिनों में सुधार नहीं होता, तो अभिभावक सीधे बोर्ड से संपर्क कर सकेंगे। जन्म तिथि संबंधी त्रुटियों को रोकने के लिए बोर्ड ने रजिस्ट्रार बर्थ एंड डेथ विभाग के साथ समन्वय किया है। डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र का नंबर दर्ज करते ही छात्र का सही डेटा सरकारी रिकॉर्ड से स्वतः प्राप्त हो जाएगा, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
स्कूलों में एडमिशन व विड्रॉल का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित
स्कूलों में एडमिशन और विड्रॉल का पूरा रिकॉर्ड अब डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। स्टूडेंट्स वर्षों बाद भी अपनी शैक्षणिक जानकारी ऑनलाइन देख सकेंगे। स्कूल बदलने की स्थिति में भी स्टूडेंट्स की पूरी शैक्षणिक यात्रा पोर्टल पर दर्ज रहेगी। वर्तमान में सर्टिफिकेट में नाम, माता-पिता के नाम या जन्म तिथि में सुधार के लिए बोर्ड अलग अलग श्रेणियों में फीस वसूलता है। नई व्यवस्था लागू होने से ऐसी गलतियों में कमी आएगी और छात्रों व अभिभावकों को अतिरिक्त खर्च से भी राहत मिलेगी। पंजाब के करीब 26 हजार से अधिक सरकारी और निजी स्कूलों तथा 50 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को इस नई डिजिटल पहल का लाभ मिलने की उम्मीद है।


