CM भगवंत मान श्री अकाल तख्त के साथ टकराव का रास्ता न अपनाएं: फैडरेशन ग्रेवाल

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श्री अकाल तख्त साहिब के साथ टकराव करने वाले नादिर शाह, अहमद शाह अब्दाली और मस्सा रंगड़ को पड़ी थी मुंह की खानी

आम आदमी पार्टी के विधायक और मंत्री जत्थेदार के आदेशों का पालन करें

जालंधर, बेअदबी कानून में संशोधनों को लेकर शुरू हुई चर्चा अब श्री अकाल तख्त साहिब के साथ टकराव तक पहुंच गई है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पहले बाहरी हमलावर जैसे नादिर शाह, अहमद शाह अब्दाली और मस्सा रंगड़ श्री अकाल तख्त साहिब के साथ टकराए थे और उन्हें मुंह की खानी पड़ी। बाद में देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी सत्ता के नशे में श्री अकाल तख्त साहिब के साथ टकराईं और उनका क्या हश्र हुआ, यह इतिहास के पन्नों में दर्ज है।

फैडरेशन ग्रेवाल के नेताओं भाई गुरचरण सिंह ग्रेवाल, गुरबख्श सिंह खालसा, परमजीत सिंह धर्म सिंह वाला और सुखमिंदर सिंह राजपाल ने प्रेसवार्ता के दौरान ने इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पंजाब सरकार को सलाह है कि वह श्री अकाल तख्त साहिब के साथ टकराव का रास्ता छोड़ दे। जत्थेदार साहिब द्वारा मंत्रियों एवं हर पार्टी के विधायक जारी किए गए आदेशों का पालन करें। सिख भावनाएं यही मांग करती हैं कि भविष्य में ऐसी कोई गलती न हो, इसके लिए रास्ता साफ किया जाए।

श्री अकाल तख्त साहिब के साथ टकराना इतिहास का एक काला अध्याय साबित होगा। इसलिए सरकार इस रास्ते को त्यागे, अपनी गलती स्वीकार करे और कानून में आवश्यक सुधार करे। यदि इसके बावजूद सरकार श्री अकाल तख्त साहिब के साथ टकराव का रास्ता अपनाती है, तो ऐसी सरकार को पंजाब पर शासन करने का कोई अधिकार नहीं है।

भाई ग्रेवाल ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता और सम्मान को बनाए रखने के लिए हमें सभी गुरु नानक नाम लेवा तथा मानवता की भलाई चाहने वाले लोगों को डटकर खड़ा होना चाहिए। श्री अकाल तख्त साहिब ने हमेशा अत्याचार और जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद की है तथा गरीब और कमजोर लोगों की रक्षा के लिए पहरा दिया है। श्री अकाल तख्त साहिब से प्रेरणा लेकर सिख कौम ने विदेशी आक्रमणकारियों, अंग्रेजों तथा देश में सिख विरोधी मानसिकता रखने वालों को करारा जवाब दिया है और इतिहास इसका गवाह है। आज हम इस बात में विश्वास रखते हैं कि गलती किसी से भी हो सकती है और उसे सुधारा भी जा सकता है।

इस अवसर पर जगराज सिंह विरक, गुरबख्श सिंह सेखों, डॉ. कुलवंत सिंह, परमजीत सिंह, अवनीत सिंह, सुखचैन सिंह, हरमिंदर सिंह सियाल, कुलजीत सिंह चावला, रुपिंदर सिंह, मनदीप सिंह खुर्द, प्रभजीत सिंह काहलो, गुरविंदर सिंह, परमिंदर सिंह, कमलप्रीत सिंह पंपली और सतपाल सिंह सिद्दीकी सहित अन्य उपस्थित थे।

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