राजपाल ने कहा- भगवान की लाठी में आवाज़ नहीं होती, लेकिन उसका न्याय जरूरत होता है
जालंधर: शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता सुखमिंदर सिंह राजपाल ने पंजाब विधानसभा में शिरोमणि अकाली दल की विधायक गनीव कौर मजीठिया के साथ हुए व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की। कहा कि उन्हें श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से संबंधित संशोधन विधेयक पर अपना पक्ष रखने से रोकना और उनका अपमान करना लोकतंत्र और नारी सम्मान, दोनों का अपमान है।
राजपाल ने कहा कि गनीव कौर मजीठिया ने सदन में सरकार को 29 जून 2026 को श्री अकाल तख्त साहिब में किए गए अपने वादे की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार ने जत्थेदार साहिब के समक्ष यह भरोसा दिया था कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से संबंधित संशोधन विधेयक में सुझाए गए सभी संशोधनों को शामिल कर पुनः भेजा जाएगा। लेकिन 30 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सरकार ने एक भी सुझाव को लागू नहीं किया।
उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां द्वारा विधानसभा को “गुरु की संगत” बताना वास्तविकता से परे है। गुरु की संगत वह होती है जहां गुरबाणी का प्रचार हो, नाम सिमरन हो और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप विराजमान हो। विधानसभा एक लोकतांत्रिक संस्था है, जहाँ राजनीतिक बहस और विचार-विमर्श होता है। इसलिए इसकी तुलना गुरु की संगत से नहीं की जा सकती।
राजपाल ने कहा कि सिख धर्म में महिलाओं को अत्यंत सम्मान और ऊँचा स्थान दिया गया है। ऐसे में एक महिला विधायक का सदन में अपमान करना न केवल नारी सम्मान बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ समाज में गलत संदेश देती हैं और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी प्रभावित करती हैं।
उन्होंने कहा कि सत्ता का अहंकार हमेशा नहीं रहता। पंजाब की जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर अपना फैसला अवश्य देगी। उन्होंने अंत में कहा, “भगवान की लाठी में आवाज़ नहीं होती, लेकिन उसका न्याय अवश्य होता है।


