4 डॉक्टरों और 1 सीए के खिलाफ कोर्ट ने दिए FIR के आदेश :  जालंधर में फर्जी दस्तावेज लगाकर अस्पताल की बैलेंसशीट में गड़बड़ी का आरोप

क्राइम पंजाब सेहत
Spread the love

आदेश के अनुसार  डॉ. कपिल गुप्ता, डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. संजय मित्तल, डॉ. अनवर इब्राहिम और चार्टर्ड अकाउंटेंट संदीप कुमार सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी

जालंधर । एक निजी अस्पताल की बैलेंसशीट में गड़बड़ी के आरोप में जालंधर जिला अदालत ने नवीं बारादरी के थाना प्रभारी को चार नामी डॉक्टरों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह फैसला डॉ. पंकज त्रिवेदी बनाम राज्य मामले में सुनाया है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता डॉ. पंकज त्रिवेदी की ओर से एडवोकेट मनित मल्होत्रा कोर्ट में पेश हुए। केस में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि आरोपियों ने जानबूझकर आय-व्यय से जुड़े दस्तावेजों में गलत आंकड़े दिखाकर आर्थिक लाभ उठाया। उन्होंने कोर्ट के समक्ष तथ्यों और दलीलों को रखते हुए आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।

नवीं बारादरी थाना प्रभारी को दिए पर्चा दर्ज करने के आदेश

आदेश में दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने शहर के प्रमुख डॉक्टर डॉ. कपिल गुप्ता, डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. संजय मित्तल, डॉ. अनवर इब्राहिम और चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए संदीप कुमार सिंह के खिलाफ नवीं बारादरी थाना प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 465, 467, 468, 471 और 477 के तहत FIR दर्ज की जाए। इन धाराओं को गंभीर अपराधों की श्रेणी में माना जाता है और इनमें सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच निष्पक्ष और उच्च स्तर पर की जाए ताकि पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सके। इस आदेश ने चिकित्सा जगत और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।

बैलेंसशीट व अकाउंट्स में बड़ी हेरीफेरी का आरोप

जानकारी के मुताबिक अस्पताल की बैलेंसशीट और अकाउंट्स में बड़े स्तर पर हेराफेरी के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता डॉ. पंकज त्रिवेदी ने अदालत में यह आरोप लगाया गया कि अस्पताल की असली बैलेंस शीट जिस पर 9 साझेदारों के हस्ताक्षर थे, उसे जानबूझकर बदल दिया गया। बाद में एक जाली बैलेंस शीट तैयार की गई, जिस पर केवल 3–4 आरोपियों के हस्ताक्षर थे और उसी फर्जी दस्तावेज को आयकर विभाग और बैंक में जमा कराया गया। यह भी कहा गया कि यह सब कार्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की मदद से किया गया और फर्जी दस्तावेजों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया गया।

घाटे में पार्टनर्स को करोड़ों के वेतन

कोर्ट को बताया गया कि जब अस्पताल खुद भारी घाटे में चल रहा था, उस समय भी कुछ डॉक्टरों को करोड़ों रुपए का वेतन दिखाया गया, जबकि साझेदारी करार के अनुसार घाटे की स्थिति में किसी को भुगतान नहीं किया जाना था। यह सब बिना सभी साझेदारों की सहमति के किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *