इंदिरा भवन में शाम 4:30 बजे होगी अहम बैठक, पंजाब प्रभारी, नेता विपक्ष, चन्नी और रंधावा भी रहेंगे मीटिंग में शामिल
पंजाब कांग्रेस की एक बेहद अहम बैठक की तारीख में बदलाव किया गया है। पहले यह बैठक 23 जनवरी को प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे कल शाम 4:30 बजे इंदिरा भवन में आयोजित किया जाएगा। बैठक को लेकर पार्टी के अंदरूनी हलकों में राजनीतिक हलचल तेज होती देखी जा रही है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के पंजाब प्रभारी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, कांग्रेस विधायक दल (CLP) के वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा शामिल होंगे। इन सभी नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए बैठक को सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और निर्णायक माना जा रहा है।
पंजाब की राजनीति में लगातार बदलते हालात के बीच कांग्रेस की यह बैठक आने वाले दिनों में पार्टी की दिशा और दशा तय करने वाली मानी जा रही है।
संगठन से लेकर नेतृत्व तक मंथन
सूत्रों के मुताबिक बैठक में पार्टी संगठन की मौजूदा स्थिति, विधानसभा में कांग्रेस की भूमिका और ग्राउंड लेवल पर पार्टी को मजबूत करने की रणनीति पर गहन चर्चा होगी। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और विपक्ष की सक्रियता के बीच कांग्रेस अपनी संगठनात्मक कमियों और नेतृत्व के संतुलन को लेकर मंथन कर सकती है। इतना ही नहीं इस बैठक में पंजाब प्रदेश प्रधान और विधायक दल के नेता को बदलने जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा।
चन्नी और रंधावा की मौजूदगी के मायने
पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा की बैठक में भागीदारी को दलित वोट बैंक, माझा और दोआबा क्षेत्र की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों नेता पार्टी के भीतर अलग-अलग प्रभाव रखते हैं और उनकी भूमिका को लेकर लंबे समय से राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं।
चन्नी के बयान पर मचा बवाल
इन दिनों कांग्रेस के भीतर चन्नी की तरफ से दलितों को इग्नोर किए जाने के बयान को लेकर काफी खलबली मची हुई है। पार्टी हाईकमान चन्नी के इस बयान से नाखुश है। जिसमें चन्नी ने कहा था कि कांग्रेस ने पंजाब में सभी बड़े पदों पर उच्च जाति के नेताओं को बैठा रखा है, दलितों को दरकिनार किया गया है। इसी बयान के बाद पंजाब ही नहीं बल्कि पार्टी हाईकमान तक हलचल हो गई है। चन्नी को अपने बयान पर वीडियो रिलीज करके स्पष्ट करना पड़ा कि उन्होंने जात-पात की बात नहीं की है। वहीं कांग्रेसी नेता भी उनका बचाव करते नजर आ रहे हैं।
आगामी सियासी एजेंडे पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक आगामी चुनावी रणनीति, पार्टी लाइन स्पष्ट करने, और सरकार के खिलाफ मुद्दों को धार देने के लिहाज से अहम साबित हो सकती है। साथ ही, पार्टी के भीतर अनुशासन, समन्वय और एकजुटता का संदेश देने की भी कोशिश की जाएगी।

