साथियों की रिहाई न होने पर भड़के किसान, संगरूर में लाठीचार्ज
पुलिस अधिकारी बोले- किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं
बठिंडा में चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) और पुलिस के बीच झड़प हो गई। किसान जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने जा रहे थे। लेकिन इससे पहले पुलिस ने उन्हें रोक लिया। किसान पुलिस बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने लगे। इससे वहां बवाल बढ़ गया।
किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इससे किसानों में अफरातफरी मच गई। वहीं, बठिंडा में प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे किसानों पर संगरूर में पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान एक किसान की टांग टूट गई। वहीं महिला बेहोश हो गई।
9 महीने पहले टीचरों को हटाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे 2 किसानों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनकी रिहाई को लेकर किसान यूनियन ने प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसके लिए पूरे प्रदेश के किसानों को पहुंचने के लिए कहा गया था।
डीएसपी-नायब तहसीलदार को धरने में बैठाया
शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने जा रहे किसानों को पुलिस ने हाईवे पर गांव ज्योंद के पास रोक लिया। किसान वहीं धरने पर बैठ गए। इस दौरान DSP गुरप्रीत सिंह और नायब तहसीलदार को डेढ़ घंटे तक घेर कर बैठाए रखा।
किसानों का कहना था कि जब तक उनके गिरफ्तार साथियों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक वे अधिकारियों को नहीं छोड़ेंगे और हर हाल में अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे। बताया जा रहा है कि शाम को किसान फिर से आगे बढ़ने लगे तो पुलिस उनको रोकने लगी। इस पर विवाद बढ़ गया।
किसान आगे बढ़ने लगे तो आंसू गैस के गोले छोड़े
पहले पुलिस ने रोकने की कोशिश की। लेकिन एकजुट होकर किसान आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने आंसू गैस को गोले छोड़े। इससे किसान तितर-बितर हुए। लेकिन अभी भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है।
साथी की रिहाई के लिए कर रहे प्रदर्शन
यह पूरा विवाद नौ महीने पुराने एक मामले से जुड़ा है। स्कूल से टीचरों को हटाने के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन किया था। इसमें पुलिस ने गांव चाउके के बलदेव सिंह और गांव जिजंद के शगनदीप सिंह बठिंडा सेंट्रल जेल में बंद हैं। किसान यूनियन इन दोनों साथियों की तुरंत रिहाई की मांग कर रही है। डीएसपी गुरप्रीत सिंह ने बताया कि प्रशासन ने कल और आज भी किसान नेताओं झंडा सिंह जेठूके और शिंगारा सिंह मान के साथ बैठक की थी। पुलिस का तर्क है कि रिहाई की कुछ कानूनी प्रक्रियाएं होती हैं, जिनमें समय लगता है। लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे और बठिंडा स्थित कार्यालय की ओर कूच करने का प्रयास किया। जिसके बाद उन्हें हाईवे पर ही रोकना पड़ा।
विवाद खत्म करने का प्रयास
जिला प्रशासन लगातार बातचीत के माध्यम से विाद खत्म करने का प्रयास कर रहा है। पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को घरों से भी राउंडअप किया है। डीएसपी ने कहा है कि उन्होंने पूरी घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी है और अब निर्देशों के आधार पर ही अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनके साथियों को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

