इमिग्रेंट्स पर सरकार का रुख भी लगातार सख्त होता जा रहा है
30,000 शरणार्थी आवेदकों को प्रोसीजरल फेयरनेस लेटर्स भेजे
सीमित समय में अतिरिक्त सबूत व जानकारी पेश करने का मौका
वे लोग जो अलग-अलग आधार पर शरण लेकर कनाडा में रह रहे
नई दिल्ली
कनाडा में इमिग्रेंट्स और शरणार्थियों को लेकर सरकार का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। बड़ी संख्या में शरणार्थियों और अस्थायी रूप से रह रहे लोगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिनमें संकेत दिया गया है कि वे अब देश में रहने के पात्र नहीं हो सकते और उन्हें वापसी की तैयारी करनी पड़ सकती है। दरअसल Immigration, Refugees and Citizenship Canada ने करीब 30,000 शरणार्थी आवेदकों को “प्रोसीजरल फेयरनेस लेटर्स” भेजे हैं। इन नोटिसों में कहा गया है कि उनके दावे तय मानकों पर खरे नहीं उतर सकते। साथ ही आवेदकों को सीमित समय में अतिरिक्त सबूत और जानकारी पेश करने का मौका दिया गया है।
डिपोर्टेशन नहीं पर खतरा बरकरार
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये सीधे “डिपोर्टेशन ऑर्डर” नहीं हैं, लेकिन चेतावनी दी गई है कि अगर आवेदक अयोग्य पाए जाते हैं, तो उन्हें देश छोड़ना पड़ सकता है। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ निर्वासन की कार्रवाई शुरू हो सकती है। इस सख्ती के पीछे नया कानून Bill C-12 माना जा रहा है, जिसने शरण आवेदन प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा कड़ा बना दिया है।
14 दिनों के भीतर करना होगा दावा
अब जो लोग कनाडा आने के एक साल के भीतर शरण के लिए आवेदन नहीं करते, उनके केस को Immigration and Refugee Board of Canada तक नहीं भेजा जाएगा। इसके अलावा अमेरिका से अनियमित तरीके से सीमा पार कर आने वाले लोग अगर 14 दिनों के भीतर दावा नहीं करते, तो वे भी अपात्र हो सकते हैं।
भारतीयों पर भी पड़ सकता है असर
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि इस सख्ती का असर भारतीय आवेदकों पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर वे लोग जो अलग-अलग आधारों पर शरण लेकर कनाडा में रह रहे हैं, उनके मामलों की दोबारा जांच हो सकती है। कनाडा की यह सख्ती उसकी शरणार्थी नीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।

