सरकार की सिफारिश, केंद्रीय आयोग की सलाह और जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद दी गई मंजूरी
चंडीगढ़।
पंजाब के पूर्व चीफ सेक्रेटरी और रिटायर्ड IAS अफसर वीके जंजुआ के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला चलेगा। केंद्र सरकार ने 2 लाख रुपए रिश्वत मामले में उनके खिलाफ केस चलाने की मंजूरी दे दी है। यह मामला साल 2009 का बताया जा रहा है। उस समय वीके जंजुआ इंडस्ट्री एवं कॉमर्स विभाग में डायरेक्टर-कम-सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे। आरोप है कि इसी दौरान उन्हें रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। विजिलेंस विभाग ने पहले IAS अधिकारी होने के कारण केस में आगे कार्रवाई से इनकार कर दिया था। बाद में इस मामले में केंद्र सरकार से अनुमति मांगी गई। अब मंजूरी मिलने के बाद केस की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होगी।
5 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई
दरअसल मामला 9 नवंबर 2009 का है। जब लुधियाना निवासी तुलसी राम मिश्रा ने आरोप लगाया था कि उनके प्लॉट के साथ लगती खाली जमीन के आवंटन के लिए वीके जंजुआ द्वारा 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई। तब वह जंजुआ इंडस्ट्री एवं कॉमर्स विभाग के डायरेक्टर कम सेक्रेटरी पद पर थे।
विजिलेंस ने ट्रैप लगाकर पकड़ा था
शिकायतकर्ता का कहना था कि वे वर्ष 2001 से जमीन आवंटन के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन हर बार यह कहकर मना कर दिया जाता था कि जमीन उपलब्ध नहीं है। शिकायत की जांच के दौरान विजिलेंस ने ट्रैप लगाने की योजना बनाई और उन्हें रिश्वत लेते पकड़ा था।
केंद्र का कहना-पर्याप्त सबूत मिले
जानकारी के अनुसार डिपार्टमेंट ऑफ परसोनल एंड ट्रेनिंग ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है। आदेश में कहा गया है कि जांच में प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मिले हैं।
सरकार की सिफारिश पर दी मंजूरी
केंद्र सरकार ने यह मंजूरी पंजाब सरकार की सिफारिश, केंद्रीय सतर्कता आयोग की सलाह और जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद दी है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सतपाल जैन ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जानकारी दी। याचिका में अभियोजन की मंजूरी न देने पर कार्रवाई की मांग की थी।


