नितिन कोहली के विकास दावों की खुली पोल, अब नए 59 करोड़ से कहां और कौन सा होगा विकास!

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सेंट्रल हलके के पार्क खस्ता हाल हैं, टूटी सड़कों और खड्डों को ठीक नहीं करवा पा रहे कोहली

लाइव होकर पूर्व विधायक बेरी ने लगाए सेंट्रल हलके की बदहाली के आरोप

जालंधर, एक तरफ से आम आदमी पार्टी के जालंधर सेंट्रल हलका इंचार्ज नितिन कोहली अगले 6 महीने में 59 करोड़ रुपए खर्च करने का दावा कर रहे हैं और दूसरी तरफ सेंट्रल हलका बदहाल है। हलके के पार्कों की हालत खस्ता है और टूटी सड़कों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गड्डों और खड्डों ने लोगों का बुरा हाल कर रखा है। आखिर हलका इंचार्ज कोहली ने पैसा कहां लगाया है और सेंट्रल हलके के किस विकास की बात कर रहे हैं।

कांग्रेस के जिला शहरी प्रधान और सेंट्रल हलके के पूर्व विधायक राजिंदर बेरी लाइव होकर सेंट्रल हलके की बदहाल तस्वीर दिखाते हुए यही बताने की कोशिश कर रहे हैं। बेरी ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर सेंट्रल हलका के उस विकास की तस्वीर को दिखाने की कोशिश है, जिसका दम भरकर नितिन कोहली अपनी पीठथपथपाते नहीं थकते। बेरी ने दिखाया कि कैसे कांग्रेस सरकार के समय विकसित किए गए नंगलशामां से लद्देवाली तक के पार्कों की हालत कैसे खस्ता बना दिया गया है।

बता दें कि नितिन कोहली पहले भी कई बार सेंट्रल हलके के विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे कर चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। आज भी हलके की कई सड़कें, गलियां, सीवरेज व्यवस्था, स्ट्रीट लाइटें, पार्क और सफाई व्यवस्था बदहाल हैं। लोगों को रोजमर्रा की मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पार्कों में जंगली बूटी और घास इतनी उगी है कि लोगों को सैर करने के लिए सड़क पर चलना पड़ रहा है। ओपन जिम की हालत खस्ता है। उसका उपयोग लोग नहीं कर पा रहे हैं।

सेंट्रल हलके के अंतर्गत लद्धेवाली रोड स्थित पार्क की बदहाली सामने आई, जहां घास और झाड़ियां उगी हुई हैं तथा ओपन जिम भी उपयोग के लायक नहीं हैं। यह स्थिति साफ दिखाती है कि सरकार पहले से बनी सार्वजनिक सुविधाओं का रखरखाव तक नहीं कर पा रही। जब पार्कों की सफाई और रखरखाव नहीं हो रहा, तब करोड़ों रुपये के नए विकास कार्यों के दावे जनता के गले नहीं उतरते।

विकास केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया पोस्ट और घोषणाओं से नहीं होता, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। जनता अब घोषणाओं से नहीं, बल्कि काम का हिसाब मांग रही है। यदि वास्तव में 59 करोड़ रुपये खर्च होने हैं तो सरकार स्पष्ट करे कि यह राशि किन-किन परियोजनाओं पर, किस समय सीमा में और किस एजेंसी के माध्यम से खर्च होगी। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि इन परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी मिल चुकी है या नहीं।

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