जंग-ए-आज़ादी मेमोरियल केस : डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द के खिलाफ FIR कैंसिल, सभी 26 को क्लीन चिट

क्राइम पंजाब
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विजिलेंस ब्यूरो ने कोर्ट से कहा- मामला कानूनन टिकने लायक नहीं है, FIR रद्द कर दी जाए

जालंधर के बहुचर्चित जंग-ए-आजादी मेमोरियल करतारपुर में कथित गड़बड़ियों के संबंध में ‘अजीत प्रकाशन ग्रुप’ के मुख्य संपादक डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द और 26 अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई FIR को रद्द करने की जालंधर कोर्ट ने इजाजत दे दी है।

गौरतलब है कि माननीय एडिशनल सैशन्स जज पी.एस. राय की कोर्ट में विजिलेंस डिपार्टमेंट ने इस संबंध में पहले दर्ज की गई FIR को कैंसिल करने के लिए एक एप्लीकेशन दी थी। माननीय कोर्ट ने FIR रद्द करने के बारे में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ऋषि भारद्वाज की डिटेल्ड दलीलों को ध्यान से सुनने के बाद 31 जनवरी, 2026 को संबंधित FIR रद्द करने की अर्जी स्वीकार कर ली।

2 दिसंबर, 2025 को सरकारी प्रॉसिक्यूटर ने विजिलेंस ब्यूरो के DSP के निर्देशों पर माननीय पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जवाब दिया था कि विजिलेंस डिपार्टमेंट की FIR- नंबर 09, तारीख 22-5-2024, जो पुलिस स्टेशन, विजिलेंस ब्यूरो, रेंज जालंधर, ज़िला जालंधर में सेक्शन 406, 409, 420, 465, 467, 468, 471, 120-B I.P.C. के तहत प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट, 1988 के सेक्शन 12(1)(a) और 13(2) के तहत रजिस्टर हुई थी, को कैंसल करने के बारे में रिपोर्ट तैयार करने का प्रोसेस चल रहा है।

जिसकी कैंसलेशन रिपोर्ट चार हफ़्तों के अंदर संबंधित कोर्ट के सामने पेश की जाएगी। विजिलेंस डिपार्टमेंट ने माननीय हाईकोर्ट में कहा था कि तथ्यों और नतीजों को देखते हुए, यह सम्मानपूर्वक कहा जाता है कि यह मामला कानून की नज़र में टिकने लायक नहीं है। इसलिए, विनम्रतापूर्वक अनुरोध है कि FIR रद्द कर दी जाए।

2023 में डॉ. हमदर्द और 26 अन्य के खिलाफ शुरू की थी जांच

पंजाब सरकार के विजिलेंस डिपार्टमेंट ने 2023 में ‘अजीत प्रकाशन ग्रुप’ के एडिटर-इन-चीफ और जंग-ए-आज़ादी मेमोरियल करतारपुर फाउंडेशन के मेंबर-सेक्रेटरी डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द और 26 अन्य अधिकारियों के खिलाफ कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच शुरू की थी।

डॉ. हमदर्द ने मांगी थी निष्पक्ष एजेंसी या CBI जांच

डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द ने CWP नंबर 12570 ऑफ़ 2023 फाइल करके माननीय पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट, चंडीगढ़ का दरवाजा खटखटाया था। डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द की तरफ से माननीय हाईकोर्ट में फाइल की गई याचिका का बचाव सीनियर एडवोकेट एस. राजिंदर सिंह चीमा, एडवोकेट अर्शदीप सिंह चीमा और एडवोकेट आर. कार्टके ने किया था। इस याचिका के ज़रिए, उन्होंने चुनौती दी थी। विजिलेंस ब्यूरो की शुरू की गई शुरुआती जांच के खिलाफ अपील की और मांग की कि मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी या CBI से कराई जाए।

हाईकोर्ट ने लगाई थी गिरफ्तारी पर रोक

माननीय हाईकोर्ट ने 16-8-2023 के अपने आदेश में विजिलेंस ब्यूरो को याचिकाकर्ता के व्यवहार और जंग-ए-आज़ादी फाउंडेशन के फैसले लेने की प्रक्रिया में विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से देखी गई अनियमितताओं, उल्लंघनों और गैर-कानूनी कामों का खास संदर्भ के साथ ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया था। माननीय पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद डॉ. हमदर्द की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। सरकारी पक्ष ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन उसे अपने पक्ष में आदेश नहीं मिल सका।

SIT को नहीं मिला कोई गैर-कानूनी कामों का सबूत

ऊपर दिए गए आदेश के अनुसार, मामले में आरोपी बनाए गए दूसरे अधिकारियों और इंजीनियरों ने 23-10-2024 को विजिलेंस ब्यूरो के चीफ डायरेक्टर को एक एप्लीकेशन दी थी, जिसमें कथित उल्लंघनों और अनियमितताओं के जवाब में एक विस्तृत स्पष्टीकरण पेश किया गया था। इसके बाद, विजिलेंस ब्यूरो के चीफ डायरेक्टर ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई थी। मामले की आगे की जांच के लिए टीम (SIT) बनाई गई। उस SIT की जांच के दौरान, कही जा रही गड़बड़ियों और गैर-कानूनी कामों का कोई सबूत नहीं मिला।

संबंधित FIR रद्द करने की अर्जी स्वीकार

विजिलेंस डिपार्टमेंट ने सरकार की तरफ से 2 दिसंबर, 2025 को बनाई गई SIT की जांच और माननीय हाई कोर्ट की तरफ से दिए गए चार हफ़्ते के समय को ध्यान में रखते हुए, 2 जनवरी, 2026 को माननीय कोर्ट में FIR रद्द करने के लिए अर्जी दी थी। माननीय कोर्ट ने FIR रद्द करने के बारे में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ऋषि भारद्वाज की डिटेल्ड दलीलों को ध्यान से सुनने के बाद, 31 जनवरी, 2026 को संबंधित FIR रद्द करने की अर्जी स्वीकार कर ली।

एफआईआर को रद्द करने को उठी थी जोरदार आवाज

डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द और 26 दूसरे अधिकारियों के खिलाफ जंग-ए-आज़ादी मेमोरियल बनाने के मामले में विजिलेंस की जांच पर पंजाब के पत्रकार, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों और पंजाबियों ने कड़ी प्रतिक्रिया और विरोध जताया था। पंजाब सरकार से जांच तुरंत रोके जाने की मांग की। कहा डॉ. हमदर्द जैसी बेदाग़ पर्सनैलिटी पर करप्शन या दूसरी गड़बड़ियों का आरोप लगाना पूरी तरह से गलत और जायज़ नहीं है। उन्होंने अपनी बिज़ी ज़िंदगी से लंबा समय निकालकर पंजाब के आज़ादी के दीवानों की शानदार हिस्ट्री को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए इस प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी ली। उन्होंने बहुत ही तारीफ़ के काबिल काम किया, जिसके लिए उनकी तारीफ़ होनी चाहिए।

‘अजीत प्रकाशन ग्रुप’ पत्रकारिता के ऊंचे स्टैंडर्ड को रखेगा कायम

इस फ़ैसले पर खुशी और संतोष ज़ाहिर करते हुए डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द ने कहा कि ‘अजीत प्रकाशन ग्रुप’ हमेशा पंजाब, देश, इसकी भाषा और संस्कृति की खुशहाली में बिना डरे योगदान देता रहा है और भविष्य में भी यह संस्था पत्रकारिता के ऊंचे स्टैंडर्ड को बनाए रखते हुए पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत की बेहतरी के लिए पूरी लगन के साथ ऊपर बताए गए कामों के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।
डॉ. हमदर्द ने कहा कि जंग-ए-आज़ादी मेमोरियल देश की आज़ादी के लिए अविभाजित पंजाब के दिए गए योगदान की शानदार कहानी बताता है। जो इतिहास के पन्नों में हमेशा सुनहरे अक्षरों में चमकता रहेगा। स्वर्गीय मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, उस समय के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी कई बार इस महान स्मारक पर आकर तारीफ कर चुके थे।

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